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राज
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शास्त्र तन्त्र भाषा इतिहास।
राज 2 months ago
अयनाम्श। प्रचलित पंचांगों में मकर संक्रान्ति माघ कृष्ण एकादशी के दिन माना गया है। सायन अथवा वास्तविक उत्तरायण पौष शुक्ल प्रतिपदा के दिन था। यह चौबीस दिनों का अन्तर अयनाम्श कहा जाता है जो नक्षत्रमान वर्ष तथा अयनमान वर्ष में पृथकता के कारण है। ऋतुचक्र अयनमान है॥ कलि अहर्गण आधारित परिकलन में मकर संक्रान्ति पौष पूर्णिमा के दिन था जिससे केवल तेरह दिनों का अयनाम्श प्राप्त होता है। इस भेद अथवा परिकलनदोष का मूल कारण अन्वेषणीय।
राज 2 months ago
htime.el । अद्य १८७२५७४ कल्यहर्गण मंगलवार १९४७ गतशकाब्द कालसम्वत्सर पौषमास शुक्लपक्ष दशमीतिथि षष्ठमुहूर्त्त पंचदशीकला ८९ निमेष। सूर्य धनुराशि चन्द्रमा भरणीनक्षत्र।
राज 3 months ago
षष्टिसम्वत्सर नाम। अग्निपुराण अध्याय १३९ से। शोधनीय। युवा अथवा पूर्ण। सुभानु अथवा स्वर्भानु। दुर्मुख के पूर्व दुष्कर होना चाहिए। शुभकृत् तथा शोभकृत् दो के स्थान पर एक ही शोभन होना चाहिए। आनल अथवा आनन। कालयुक्त अथवा काल। क्रोधी से आनन्द तक ग्यारह नाम अनुपलब्ध। image
राज 3 months ago
अद्य कालयुक्तसम्वत्सर पौषमास कृष्णदशमी रविवार हस्तनक्षत्र। बार्हस्पत्य सम्वत्सर परिकलन के लिए सूर्यसिद्धान्त तथा ज्योतिषतत्त्व से प्राप्त विधि अनुसार कालयुक्त सम्वत्सर चल रहा है विश्वावसु नहीं।
राज 3 months ago
जपान चीनिस्तान घटना विवरण यूट्यूब पर 董事長開講 से। image
राज 3 months ago
लोकसंग्रह की जय हो। image
राज 3 months ago
श्रोत्रिय। मुण्डकोपनिषद भाष्य प्रथम मुण्डक द्वितीय खण्ड। ॰ गुरुमेव आचार्यं ॰ श्रोत्रियम् अध्ययनश्रुतार्थसम्पन्नं ॰ ॥१२॥ अत्रिस्मृति। जन्मना ब्राह्मणो ज्ञेयः संस्कारैर्द्विज उच्यते। विद्यया याति विप्रत्वं श्रोत्रियस्त्रिभिरेव च ॥१३८॥
राज 3 months ago
अमुक स्मृति विशेष। आर्षं धर्मोपदेशं च वेदशास्त्राऽविरोधिना। यस्तर्केणानुसंधत्ते स धर्मं वेद नेतरः ॥१२॰१०६॥
राज 4 months ago
ब्रह्मसूत्र अ॰३ पा॰१ सू॰२५ भाष्य। अयं धर्मोऽयमधर्म इति शास्त्रमेव विज्ञाने कारणम्।